विश्वास के बारे में

 जांगिड़समाजट्रस्ट, बैंगलोर : एकऐतिहासिकयात्रा

भारत के कर्नाटक राज्य की राजधानी बैंगलोर को फूलोंकीनगरी  तथा भारतकीआई.टी. राजधानी के रूप में भी जाना जाता है। भारत के अन्य शहरों की तुलना में यहाँ का मौसम अत्यंत सुहावना और सदाबहार रहता है।

 बैंगलोर नगरी में देवशिल्पीभगवानश्रीविश्वकर्माजी का एक भव्य, अद्भुत कारीगरी एवं वास्तुकला से युक्त मंदिर स्थित है। यह मंदिर जांगिड़ समाज, बैंगलोर के अथक प्रयासों और दृढ़ संकल्प का सजीव प्रतीक है। यह समाज की एकता तथा भगवान श्री विश्वकर्मा के प्रति अटूट आस्था को दर्शाता है।

जांगिड़ / सुथार  समाज के लोग आजीविका के लिए धीरे-धीरे दक्षिण भारत आए। अपनी कड़ी मेहनत, ईमानदारी और पूर्वजों से मिले संस्कारों के बल पर उन्होंने यहाँ अपनी एक सशक्त पहचान बनाई।

संगठनकीशुरुआत

वर्ष 1988 में विश्वकर्मा जयंती से तीन दिन पूर्व विजय नगर, बैंगलोर में जांगिड़ समाज के बंधुओं ने यह विचार किया कि जयंती की रात्रि में जागरण एवं भजन-कीर्तन का आयोजन किया जाए। समाज के लोगों ने घर-घर जाकर सभी जांगिड़ बंधुओं को आमंत्रित किया। सभी ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और यह जागरण धार्मिक एवं रमणीय वातावरण में भव्य रूप से सम्पन्न हुआ।

समाज बंधुओं के उत्साह को देखकर अग्रणी बंधुओं ने अगले वर्ष की जयंती की तैयारी प्रारंभ की। समाज की मासिक बैठकें क़ब्बन पार्क में होने लगीं, जहाँ यह प्रस्ताव रखा गया कि प्रत्येक समाज बंधु से ₹101 एकत्र कर आगामी जयंती का आयोजन किया जाए।

इस विचार में प्रमुख रूप से रामचंद्रजीदायमा, पन्नालालजीकिंजा,पारसमलजीपिड़वा, कमलकिशोरजीअसलिया, रामरतनजीदुगेसर, श्यामजीअसलियाएवंबनशीलालजीलदोया सम्मिलित थे।

सामाजिकमंचकीआवश्यकता

कुछ वर्षों तक मेहनत-मजदूरी करने के बाद समाज के लोगों को आपसी मेल-मिलाप के लिए एक स्थायी मंच की आवश्यकता महसूस हुई। अमावस्या की छुट्टी के दिन आपसी मिलना-जुलना प्रारंभ हुआ और विश्वकर्मा जयंती को नियमित रूप से मनाने का निर्णय लिया गया, जो आज तक निरंतर चल रहा है।

उस समय समाज के लोगों के पास केवल एक सपना था—बैंगलोरमेंअपनेआराध्यदेवभगवानश्रीविश्वकर्माकामंदिरबनाना। यद्यपि उस समय समाज आर्थिक रूप से सक्षम नहीं था, फिर भी कुछ सकारात्मक सोच वाले बंधुओं ने समाजहित में कार्य करने का संकल्प लिया।

उद्देश्य स्पष्ट था—

  • समाज को एक मंच देना
  • आपसी मेल-मिलाप बढ़ाना
  • संकट के समय समाज बंधुओं की सहायता करना

कमेटीगठनऔरसंघर्ष

दूसरी जयंती का भव्य आयोजन चिकपेट स्थित जैन समाज भवन में हुआ, जिसमें लगभग 300 समाजबंधुओं ने भाग लिया। इसके पश्चात सर्वसम्मति से 15 सदस्योंकीकमेटी बनाई गई।

श्रीविश्वकर्माभगवानकीकृपासे दूसरी जयंती का भव्य आयोजन चिकपेट स्थित जैन समाज भवन में हुआ, जिसमें लगभग 300 समाज बंधुओं ने भाग लिया। सर्वसम्मति से 15 सदस्यों की एक कमेटी गठित की गई, जिसमें भंवरलाल गुगरिया, मदनलाल किंजा, रामचंद्र दायमा, दुर्जनराम भद्रेचा, रामरतन दुगेसर, रामचंद्र बरडवा, रतनलाल माडण, श्यामलाल असलिया, दीपचंद भद्रेचा, तुलसीराम भद्रेचा, नवरतन जोपालिया, पन्नालाल किंजा, बाबूलाल धामु, बनशीलाल लदोया एवं पुखराज लोडिवाल शामिल थे।

कमेटी ने निर्णय लिया कि जब तक समाज की अपनी भूमि नहीं होगी, तब तक समाज के कोष से कोई व्यय नहीं किया जाएगा। सात वर्षों तक सभी प्रशासनिक खर्च कमेटी सदस्यों ने स्वयं वहन किए।

आजीवन सदस्यता हेतु ₹2001 की राशि निर्धारित की गई। सिरवी समाज द्वारा नाममात्र शुल्क पर कई वर्षों तक समाज को भवन उपलब्ध कराया गया I 


वर्ष 1995 में समाज के सर्वसम्मत निर्णय से श्री भंवरलाल गुगरिया को नेतृत्व सौंपा गया, जिन्होंने लगभग 30 वर्षों तक निस्वार्थ भाव से समाज का मार्गदर्शन किया और संगठन को मजबूती प्रदान कर एक नई दिशा प्रदान की।

समाज ने 1995 मेंगिरिनगर में पहली भूमि खरीदी, परंतु बाद में उपयुक्त स्थान की तलाश करते हुए बिन्नीमिलकेपास 5500 वर्गफुटभूमि क्रय की गई। यहीं से मंदिर निर्माण की यात्रा प्रारंभ हुई।

वर्ष 2003 में मंदिर व भवन का शिलान्यास श्री खेरूँराम जी भद्रेचा एवं उनके सुपुत्रों द्वारा संपन्न हुआ वह मंदिर निर्माण के लिए एक कमेटी का गठन किया गया वह तेजेश जी लुंजा को सर्व समिति से निर्माण कमेटी का अध्यक्ष चुना गया जिनके नेतृत्व में इस भव्य मंदिर वह भवन का निर्माण कार्य सम्पन्न हुआ,  

लगभग 15 वर्षोंकीअथकमेहनत के पश्चात यह भव्य मंदिर एवं भवन पूर्ण हुआ, जिसमें भूमिगत भंडारण व रसोई, सत्संग हॉल, कार्यक्रम हॉल एवं अतिथि कक्षों की सुंदर व्यवस्था है।

श्वेत संगमरमर से निर्मित यह मंदिर वास्तुशास्त्र व शिल्पकला की अनुपम मिसाल है। इसकी नक्काशी, स्तंभ एवं शिखर हर आगंतुक को मंत्रमुग्ध कर देते हैं।

मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा का आयोजन अत्यंत भव्य रूप से हुआ, जिसमें देश-विदेश से लगभग सवालाखश्रद्धालुओं ने भाग लिया। यह जांगिड समाज के इतिहास का अभूतपूर्व आयोजन रहा।

कोरोना महामारी के समय समाज द्वारा भोजन वितरण, कोविड केयर सेंटर, ऑक्सीजन एवं दवाइयों की व्यवस्था की गई।

भविष्य में समाज द्वारा आर्धिक उत्थान वह आत्म निर्भर युवा पीढ़ी हेतु स्किलडेवलपमेंटसेंटर स्थापित करने की महत्वाकांक्षी योजना पर कार्य चल रहा है, जिससे शिक्षा, स्वास्थ्य एवं समाज के वंचित वर्गों को लाभ मिलेगा।

पिछले 35 वर्षोंमें समाज में कभी चुनाव नहीं हुआ और न ही किसी ने पद की लालसा रखी। भगवान विश्वकर्मा जी असीम कृपा से आपसी प्रेम, सौहार्द और समर्पण की यह भावना श्री भंवरलाल गुगरिया के निष्पक्ष नेतृत्व का प्रतिफल है।

भगवान श्री विश्वकर्मा की असीम कृपा से जांगिड समाज ट्रस्ट, बेंगलुरु निरंतर प्रगति के पथ पर अग्रसर है।

धन्यवाद